सर्टिफिकेट जारी होने के बाद देनदार को धारा 7 के तहत नोटिस भेजा जाता है। पटना हाईकोर्ट के अनुसार, वसूली को वैध बनाने के लिए इस नोटिस की तामील अनिवार्य है। आपत्ति दर्ज करना (Section 9): नोटिस मिलने के 30 दिनों
बिहार में हालिया बदलाव:
बिहार और उड़ीसा लोक मांग पुनर्प्राप्ति अधिनियम, 1914, राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण विधि है जो राजस्व और करों की वसूली में आसानी प्रदान करती है। यह कानून सरकारी खजाने की सुरक्षा के लिए बनाया गया है और आज भी बिहार तथा ओडिशा में भू-राजस्व और अन्य सरकारी बकायों की वसूली के लिए प्रभावी है।
सर्टिफिकेट जारी होने के बाद देनदार Commission of Revenue या निर्धारित प्राधिकारी के पास अपील कर सकता है।
प्रमाणपत्र जारी करना (Section 4 & 6):